
याचिका ‘प्रायोजित‘ होने का संदेह जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाने की दी चेतावनी
गडचिरोली : जिले में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड (एलएमईएल) की सुरजागढ़ लौह अयस्क खदानों को पर्यावरण मंजूरी (ईसी) देने के संबंध में दायर अपील में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा की याचिकाकर्ता का मुकदमा दायर करने का कोई अधिकार नहीं पाया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर याचिका ‘प्रायोजित’ होने के संदेह में भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी, जिसके बाद याचिकाकर्ता समरजीत चटर्जी ने जुर्माना बचाने के लिए याचिका वापस ले ली।
इसी साल, मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने एलएमईएल की सुरजागढ़ लौह अयस्क खदानों के क्षमता विस्तार की अनुमति को चुनौती देने वाली दो जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने दोनों जनहित याचिकाओं को ‘योग्यताहीन’ पाया था। छत्तीसगढ़ के रायपुर के एक खनन ठेकेदार, याचिकाकर्ता समरजीत चटर्जी ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के 9 मई 2025 के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने अपील वापस ले ली क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और माननीय न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने ऐसी जनहित याचिकाएँ ‘प्रायोजित जनहित याचिकाओं के अलावा कुछ नहीं’ हैं ऐसी टिप्पणी करते हुए भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। न्यायालय ने आगे कहा कि परियोजना प्रस्तावक एलएमईएल को पर्यावरण मंजूरी सक्षम प्राधिकारी द्वारा क़ानून के तहत निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुपालन के बाद ही दी गई थी।
यह ध्यान देने योग्य है कि याचिकाकर्ता समरजीत चटर्जी ने पहले ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पिछले आदेश का पालन नहीं किया है और इसी मामले में आज तक 25,000/- रुपये के जुर्माने का भुगतान करने में विफल रहे हैं।



