विधायक विनोद अग्रवाल की मुख्यमंत्री से रबी धान खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग, किसानों को राहत देने का आग्रह

गोंदिया : गोंदिया के स्थानीय विधायक विनोद अग्रवाल ने एक बार फिर किसानों के हितों की बुलंद आवाज उठाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रबी सीजन की धान खरीदी का सरकारी लक्ष्य तुरंत बढ़ाने की मांग की है।
गोंदिया जिले को ‘धान की कोठी’ के नाम से जाना जाता है, और इस साल रबी के मौसम में अपेक्षा से अधिक धान का उत्पादन हुआ है। हालांकि, सरकारी खरीदी का निर्धारित लक्ष्य इस बार किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों से काफी कम है।
विधायक अग्रवाल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि कम लक्ष्य के कारण भले ही सरकारी सब-एजेंट संस्थाओं में धान की खरीदी शुरू हो गई हो, लेकिन कई किसानों के बिल बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। इसका सीधा असर किसानों की जेब और उनके मनोबल, दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “जब उत्पादन अधिक है, और बाजार में दाम कम – तब सरकार ही किसानों की एकमात्र उम्मीद होती है। ऐसे में खरीदी लक्ष्य कम रखना अन्याय है।”
मंडी में धान के कम दाम ने पहले से ही किसानों को परेशान कर रखा है। निजी व्यापारियों द्वारा खरीदी या तो न के बराबर है या बहुत कम दाम पर हो रही है। ऐसे में अगर सरकारी खरीदी का कोटा भी सीमित रहेगा, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
गोंदिया जिले के लिए धान खरीदी का सरकारी लक्ष्य जल्द से जल्द बढ़ाया जाए। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। मार्केटिंग फेडरेशन और उसकी सब-एजेंसीज को निर्देश दिए जाएं कि वे धान खरीदी में बाधा न डालें। ऐसी मांग विधायक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से की है।
गोंदिया जिले के किसान वर्ग में विधायक की इस पहल से नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार हुआ है। गांव-गांव में इस पत्र की चर्चा है, और किसान संगठन भी विधायक के समर्थन में आगे आ रहे हैं। एक किसान नेता ने कहा, “विनोदजी का पत्र इस समय की सबसे जरूरी मांग है। अगर सरकार ने तुरंत लक्ष्य नहीं बढ़ाया, तो हजारों क्विंटल धान बिना खरीदी के खेतों में सड़ जाएगा।”
विधायक विनोद अग्रवाल का यह पत्र सरकारी तंत्र को चेतावनी है कि अगर किसानों की उपज को समर्थन नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में भू-राजनीति का स्वरूप बदल सकता है। अब देखना यह है कि महाराष्ट्र सरकार इस मांग पर कितनी जल्दी संज्ञान लेती है और किसानों को राहत देती है या नहीं।



