
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ाई थीं धज्जियाँ
गडचिरोली : पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को कलंकित करने और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले गढ़चिरोली के एक तथाकथित पत्रकार के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। दुष्कर्म पीड़िता की तस्वीर वेब पोर्टल पर प्रसारित कर उसकी पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में ‘महाराष्ट्र माझा न्यूज’ के कथित पत्रकार कैलाश शर्मा पर २ मई को मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से जिले के गैर-जिम्मेदार पत्रकारों में हड़कंप मच गया है।
आरमोरी शहर में ४ अप्रैल को एक संवेदनशील और जटिल घटना घटी थी। कानूनन किसी भी परिस्थिति में यौन उत्पीड़न की शिकार पीड़िता की पहचान (नाम या फोटो) उजागर करना एक गंभीर अपराध है। इसके बावजूद, पत्रकारिता के बुनियादी नियमों की अनदेखी करते हुए कैलाश शर्मा ने अपने निजी स्वार्थ और लोकप्रियता के लिए पीड़िता की फोटो सार्वजनिक कर दी। इस घृणित कृत्य के कारण पहले से ही संकट झेल रहे पीड़ित परिवार को भारी मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
इस घटना के बाद जिले भर में व्यापक आक्रोश व्याप्त था। ‘अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद’ ने गढ़चिरोली के पुलिस अधीक्षक को औपचारिक शिकायत सौंपकर इस विकृत मानसिकता के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़िता के रिश्तेदारों ने भी इस कृत्य के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था।
जनता के बढ़ते दबाव और कानून के उल्लंघन को देखते हुए गढ़चिरोली पुलिस ने आरोपी कैलाश शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा ७२ (१) के तहत मामला दर्ज किया है। नागरिकों का मानना है कि ऐसे तत्वों के कारण समाज में असली और ईमानदार पत्रकारों की छवि भी धूमिल हो रही है। मामला दर्ज होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस आरोपी को सलाखों के पीछे कब भेजती है।
क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं ने मांग की है कि ऐसे पत्रकारो को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।



