
गोंदिया : केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण भारत के समग्र विकास और रोजगार सृजन को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से देश में ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना कानून लागू किया गया है। १ जुलाई से पूरे देश में प्रभावी हुई इस महत्वाकांक्षी योजना का गोंदिया जिले में विधिवत शुभारंभ गोंदिया तहसील के ग्राम सावरी से किया गया। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पहले की तुलना में अधिक रोजगार, कृषि आधारित विकास, कौशल प्रशिक्षण और ग्राम पंचायतों को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए व्यापक अवसर मिलेंगे। यह प्रतिपादन क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक विनोद अग्रवाल ने किया।
विधायक विनोद अग्रवाल जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा ग्राम सावरी में आयोजित ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के भव्य शुभारंभ समारोह में बतौर उद्घाटक (मुख्य अतिथि) के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष लायकराम भेंडारकर, कार्यक्रम के अध्यक्ष व जिलाधिकारी मंदार पत्की, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनित चन्द्रा दोंतुला, पंचायत समिति सभापति मुनेश रहांगडाले, उपजिलाधिकारी भैय्या साहब बेहरे, जिप सदस्य दीपा चन्द्रिकापुरे, पूजा अखिलेश सेठ, नंदा वाढ़िवा, एसडीओ चन्द्रभान खंडाईत, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिप) विजय लोंढे, बीडीओ जितेंद्र देवरे, तहसीलदार शमशेर पठान तथा पंस सदस्य शैलजा सोनवाने प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
योजना की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए विधायक विनोद अग्रवाल ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को अब वर्ष में १२५ दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। काम मिलने के बाद मजदूरी का भुगतान मात्र ८ दिनों के भीतर सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ‘डीबीटी’ के माध्यम से किया जाएगा। यदि किसी कारणवश समय पर काम उपलब्ध नहीं होता है, तो बेरोजगारी भत्ता और मजदूरी भुगतान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति (मुआवजा) देने का भी कड़ा प्रावधान इस कानून में रखा गया है।
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। गांवों में जल संरक्षण, तालाब निर्माण, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार। खेत सड़क, ग्रामीण संपर्क मार्ग और वृक्षारोपण। स्कूल, आंगनबाड़ी, ग्राम पंचायत भवन, वाचनालय (लाइब्रेरी) तथा अन्य आधारभूत विकास कार्य किए जा सकेंगे। इसके अलावा, ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार एवं सूक्ष्म उद्योगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
योजना के माध्यम से खेत तालाब, मेड़बंदी, भूमि सुधार और कृषि उत्पादकता बढ़ाने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे खेती की लागत कम होगी, सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और निश्चित रूप से किसानों की आय में वृद्धि होगी। ग्राम पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों की योजना बनाने और उसे लागू करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
विधायक विनोद अग्रवाल ने प्रशासन का ध्यान एक महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि योजना का क्रियान्वयन करते समय ‘रेशो मेंटेनेंस’ (अनुपात रखरखाव) पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। पुरानी व्यवस्था में गलत नीतियों के कारण कई काम और भुगतान लटके हुए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर यह मामला उनके संज्ञान में लाया है और जल्द ही केंद्र के माध्यम से इसका समाधान किया जाएगा।
चूंकि इस नई योजना में ६० प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र सरकार की और ४० प्रतिशत भागीदारी राज्य सरकार की है, इसलिए अधिकारियों को ‘रेशो मेंटेनेंस’ के नियमों के तहत ही कार्य करना चाहिए ताकि भविष्य में भुगतान संबंधी कोई समस्या निर्माण न हो। यह योजना केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, आजीविका और कौशल विकास को एकीकृत कर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति देने में मील का पत्थर साबित होगी।



