
ध्यान साधना और मेंटल हाइजीन पर जोर ; संस्था के जरिए विभिन्न राज्यों के १५०० लोग हुए लाभान्वित
नागपुर : देश को व्यसनमुक्ति की ओर ले जाने के उद्देश्य से संचालित ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत, आर्ट ऑफ लिविंग की प्रेरणा से बुटीबोरी स्थित ग्रेस रेहब सेंटर में एक विशेष सेमिनार का शानदार आयोजन किया गया। डॉ. अर्चना भारती और अभय भारती के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन के घातक प्रभावों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ ठोस कदम उठाना था।
‘अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस’ के अवसर पर आयोजित इस सेमिनार में नशे की लत से लड़ने के लिए ध्यान साधना (मेडिटेशन) एवं मेंटल हाइजीन (मानसिक स्वच्छता) पर विशेष जोर देते हुए एक समग्र दृष्टिकोण (होलिस्टिक एप्रोच) और साइंटिफिक पद्धति को अपनाने की बात कही गई।
सेमीनार के दौरान जानकारी दी गई कि ग्रेस रेहब सेंटर संस्था द्वारा अब तक विभिन्न राज्यों से आए १५०० से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं और नशे के चंगुल से छूटकर एक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक वैश्विक आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के मिशन को आगे बढ़ाते हुए, यह संस्था व्यसन से जूझ रहे लोगों को सही सहायता, चिकित्सा और सटीक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस खास मौके पर उपस्थित विषय विशेषज्ञों ने नशे से छुटकारा पाने के लिए कई मूल्यवान और प्रैक्टिकल टिप्स साझा किए। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. मौसम फिरके और डॉ. नेहा फिरके ने नशे के मनोवैज्ञानिक कारणों और मानसिक स्वास्थ्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. अर्चना भारती (नागपुर) और पंजाब से आए आर्ट ऑफ लिविंग के फैकल्टी प्रिंस जुनेजा ने सुदर्शन क्रिया, ध्यान और प्राणायाम के वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए बताया कि कैसे इच्छाशक्ति और मेडिटेशन के बल पर बड़ी से बड़ी लत को मात दी जा सकती है।
इस गरिमामयी और प्रेरणादायक कार्यक्रम में ग्रेस रेहब सेंटर के प्रेसिडेंट अभय भारती, शशिकांत पुरी प्रमुखता से उपस्थित थे। इसके साथ ही, के.डी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं और बुटीबोरी क्षेत्र की विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भारी संख्या में उपस्थित रहकर समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।



